World News: पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में संसाधनों के प्रबंधन का बढ़ता सैन्यीकरण इस्लामाबाद के आर्थिक केंद्रीकरण की नीति को उजागर करता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के बजाय रणनीतिक बफर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है।
अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर देश की समृद्धि को ज़मीन के नीचे छिपे खनिज संसाधनों से जोड़कर पेश कर रहे हैं। उन्होंने पीओजीबी और खैबर पख्तूनख्वा में दुर्लभ खनिजों की खोज का हवाला देते हुए पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबारने का दावा किया है।
हालांकि रिपोर्ट (World News) का कहना है कि यह कथानक निराश जनता को उम्मीद बेचने जैसा है, जबकि वास्तविकता में संस्थागत अतिक्रमण, संसाधनों का सैन्यीकरण और सीमांत क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए गठित सैन्य-प्रभावित स्पेशल फैसिलिटेशन इन्वेस्टमेंट काउंसिल (SIFC) खनिज और ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर सेना के नियंत्रण को और मजबूत कर रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अप्रैल 2025 में माइनिंग एंड मिनरल संशोधन अधिनियम 2025 के जरिए खनन अधिकारों को केंद्र सरकार के अधीन कर दिया गया, जिससे क्षेत्रीय प्रशासन की भूमिका कमजोर हुई। इसके अलावा, पीओजीबी माइनिंग कंसेशन रूल्स 2024 में संशोधन कर इस्लामाबाद का नियंत्रण और बढ़ा दिया गया।
इन फैसलों के खिलाफ अप्रैल 2025 में शिगर घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नए नियम कॉरपोरेट और सैन्य संस्थाओं द्वारा संसाधनों की लूट को वैध बनाते हैं, जबकि उन्हें अपनी ही ज़मीन की संपदा में कोई हिस्सेदारी नहीं दी जा रही।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सीपीईसी सहित विकास के पहले किए गए वादों की तरह, मौजूदा घोषणाएं भी पीओजीबी की जनता के लिए निराशा ही साबित हो रही हैं।