Somnath Swabhiman Parv: सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास में सिमटे, भारत की आस्था आज भी अडिग

प्रथम ज्योर्तिलिंग सोमनाथ पर हुए पहले हमले के 1000 साल पूरे होने पर गुजरात के सोमनाथ मंदिर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आक्रांताओं और मंदिर के पुनर्निमाण के विरोधियों पर हमला किया।

हजार साल पुरानी सोच पर पीएम का प्रहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्होंने कभी इस पवित्र स्थल को नष्ट करने का सपना देखा था, वे आज इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि उस दौर के आक्रांता यह मान बैठे थे कि वे सफल हो गए, लेकिन आज सोमनाथ मंदिर पर लहराता ध्वज भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।

पुनर्निर्माण के विरोधियों पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के बाद भी देश में ऐसी ताकतें सक्रिय रहीं, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया। उन्होंने बिना नाम लिए उस दौर के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने का प्रयास किया गया।

राजेंद्र प्रसाद को रोकने की कोशिश का उल्लेख

पीएम मोदी ने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 1951 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। यह उस मानसिकता को दर्शाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत से दूरी बनाए रखना चाहती थी।

देश को बांटने वाली सोच से सतर्क रहने की अपील

सोमनाथ मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर सद्भावना ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी हमें उन शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है, जो समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं।

मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना

प्रधानमंत्री ने सुबह करीब 30 मिनट तक सोमनाथ मंदिर में पूजा की। उन्होंने शिवलिंग पर जल अर्पित किया, फूल चढ़ाए और पंचामृत से अभिषेक कर देश की समृद्धि और एकता की कामना की।

हजार साल पहले का आक्रमण, लेकिन आस्था अमर

पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किए गए पहले आक्रमण के बाद यह समझ लिया गया था कि सोमनाथ का अस्तित्व समाप्त हो गया, लेकिन इसके तुरंत बाद मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू हुआ। इसके बाद खिलजी के आक्रमण के बावजूद जूनागढ़ के शासकों ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया।

न सोमनाथ मिटा, न भारत की आत्मा

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संयोग नहीं बल्कि भारत की शक्ति का प्रमाण है कि आज सोमनाथ आक्रमण के एक हजार वर्ष और उसके पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदियों तक विदेशी आक्रांताओं ने भारत को समाप्त करने की कोशिश की, लेकिन न तो सोमनाथ मिटा और न ही भारत की पहचान।

कट्टरता पर सनातन की विजय

पीएम मोदी ने कहा कि आक्रांताओं को लगा कि उनकी तलवारें सनातन को पराजित कर देंगी, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि ‘सोमनाथ’ नाम ही अमरता के भाव से जुड़ा है। यह वह विचार है, जो हलाहल पीकर भी अमर रहने की प्रेरणा देता है।

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