बीएनपी नेता Tarique Rahman 17 फरवरी को लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ

Tarique Rahman: बांग्लादेश में बीएनपी नेता तारिक रहमान 17 फरवरी की शाम प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। नई कैबिनेट के शपथ समारोह की तैयारियां तेज कर दी गई हैं और इसे बड़े कूटनीतिक आयोजन के तौर पर पेश किया जा रहा है।

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने इस शपथ समारोह में शामिल होने के लिए 13 देशों के प्रमुखों को निमंत्रण भेजा है। इसे बांग्लादेश की नई सरकार की विदेश नीति और क्षेत्रीय संतुलन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

जिन देशों को न्योता भेजा गया है उनमें भारत, चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं। दक्षिण एशिया से लेकर पश्चिम एशिया तक के देशों को एक साथ बुलाना इस कार्यक्रम को कूटनीतिक रूप से काफी अहम बना रहा है।

Tarique Rahman ने 2001 में बीएनपी में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की थी

इस बार शपथ ग्रहण समारोह परंपरा के मुताबिक बंगभवन (राष्ट्रपति भवन) में नहीं, बल्कि जातीय संसद परिसर में आयोजित किया जाएगा। ढाका में होने वाला यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक रस्म नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे नई सरकार के अंतरराष्ट्रीय संदेश के रूप में देखा जा रहा है। खासकर भारत और चीन दोनों को एक साथ आमंत्रण भेजना क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है।

नई कैबिनेट के साथ शपथ लेने जा रहे 60 वर्षीय तारिक रहमान के सामने घरेलू राजनीति को स्थिर करना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित रखना बड़ी चुनौती होगी। हाल ही में हुए चुनाव में 299 सीटों पर मतदान हुआ था, जिसमें बीएनपी को 209 सीटें मिलीं जबकि जमात गठबंधन को 68 सीटों पर जीत हासिल हुई।

Tarique Rahman के बारे में जानें

तारिक रहमान प्रभावशाली जिया परिवार से आते हैं। यह वही परिवार है जिसने दशकों तक देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके माता-पिता दोनों ही बांग्लादेश के शीर्ष नेता रह चुके हैं। हालांकि प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके राजनीतिक जीवन पर विरोधियों ने भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।

किशोरावस्था में ही उनके पिता की हत्या हो गई थी। लंबे समय तक उन्हें देश से बाहर रहना पड़ा और कई विवादों का सामना करना पड़ा। उनकी मां और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के कुछ समय बाद उन्हें बीएनपी का प्रमुख बनाया गया। उसके बाद हुए चुनाव में उनकी पार्टी को बहुमत मिला।

उस समय उनकी उम्र लगभग 35 साल थी। खालिदा जिया 1991 से 1996 तक प्रधानमंत्री रहीं। उनके पिता जियाउर रहमान सेना प्रमुख से राष्ट्रपति बने थे, लेकिन 1981 में सैन्य तख्तापलट के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। वे बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे और 1978 में बीएनपी की स्थापना की थी

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