Darbhanga Maharani Death: दरभंगा राज परिवार की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और दरभंगा स्थित राज परिवार के कल्याणी निवास में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राज परिवार, स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने इसे न सिर्फ एक व्यक्ति, बल्कि एक पूरे युग के अंत के रूप में देखा।
राज परिवार ने महारानी कामसुंदरी देवी के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग कल्याणी निवास पहुंचे। परंपरागत विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार श्यामा माई मंदिर परिसर में किया जा रहा है। किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए जिला प्रशासन ने मौके पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।
सादगी, सेवा और परंपरा का प्रतीक रहीं महारानी
राज परिवार से जुड़े प्रियांशु झा ने बताया कि महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन सादगी, सेवा और परंपरा का अनुपम उदाहरण रहा। उन्होंने राजसी वैभव के बावजूद सादा जीवन अपनाया और सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी। उनका जाना सिर्फ दरभंगा राज परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे मिथिला समाज के लिए एक युग के अंत जैसा है।
महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा रियासत के अंतिम शासक महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी (Darbhanga Maharani Death) थीं। 1940 के दशक में उनका विवाह महाराजा कामेश्वर सिंह से हुआ था। महाराजा का निधन वर्ष 1962 में हो गया था। उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी देवी का निधन 1976 में हुआ, जबकि दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का देहांत 1940 में ही हो गया था। इसके बाद महारानी कामसुंदरी देवी ने दशकों तक राज परिवार की परंपराओं को संभाले रखा।
महात्मा गांधी और दरभंगा राज का ऐतिहासिक संबंध
दरभंगा राज परिवार का देश की आजादी और राष्ट्रीय आंदोलन में अहम योगदान रहा है। प्रियांशु झा के अनुसार, जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, तब उनके आंदोलन को आर्थिक और प्रचार संबंधी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे समय में गांधी जी ने मदद के लिए दरभंगा राज को पत्र लिखा था।
पत्र मिलते ही तत्कालीन महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह ने पूरा मीडिया प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया और गांधी जी को आर्थिक सहयोग भी दिया। दरभंगा राज को महात्मा गांधी का पहला बड़ा सहयोगी माना जाता है। गांधी जी के हाथों लिखा वह ऐतिहासिक पत्र आज भी सुरक्षित रखा गया है, जो इस योगदान का जीवंत प्रमाण है।

Darbhanga Maharani Death: 1962 के युद्ध में ऐतिहासिक दान
भारत-चीन युद्ध के दौरान वर्ष 1962 में जब देश गंभीर संकट में था, तब दरभंगा राज परिवार सबसे पहले मदद के लिए आगे आया। दरभंगा के इंद्रभवन मैदान में 15 मन यानी करीब 600 किलो सोना तौलकर देश को दान दिया गया। इसके अलावा राज परिवार ने अपने तीन निजी विमान भी सरकार को सौंप दिए। इतना ही नहीं, 90 एकड़ में फैला निजी एयरपोर्ट भी सरकार को दान कर दिया गया, जिस भूमि पर आज दरभंगा एयरपोर्ट स्थित है।
Darbhanga Maharani Death:शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम में भी योगदान
दरभंगा राज परिवार का योगदान केवल युद्ध या राजनीति तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम में भी इसका ऐतिहासिक योगदान रहा है। इंडियन नेशनल कांग्रेस के संस्थापक एओ ह्यूम को आर्थिक सहायता देकर आंदोलन को मजबूती दी गई। वर्ष 1880 में हर साल 10 हजार रुपये की सहायता दी जाती थी। इसके अलावा, दरभंगा राज परिवार ने देश को पहली यूनिवर्सिटी के लिए 230 एकड़ जमीन दान की थी। राज परिवार का मानना था कि ज्ञान और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के साथ ही दरभंगा राज की एक जीवित कड़ी समाप्त हो गई, लेकिन उनका जीवन और दरभंगा राज परिवार की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।