India: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कक्षा 8 की एक पाठ्यपुस्तक में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक अध्याय को लेकर NCERT को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल माफी मांगने से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह भी बताया जाए कि इस सामग्री को शामिल करने के पीछे कौन जिम्मेदार है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जे. बागची और जस्टिस पंचोली शामिल थे, ने एनसीईआरटी के निदेशक और शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की है।
अदालत की नाराजगी के बाद एनसीईआरटी ने संबंधित पुस्तक को बाजार से वापस लेने की घोषणा की और बिना शर्त माफी मांगने की बात कही। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि 32 पुस्तकों को वापस लिया जा रहा है और पूरे अध्याय की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम गठित की जाएगी।
हालांकि, अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नोटिस में माफी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और यह मामला गंभीर प्रतीत होता है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक अदालत पूरी तरह संतुष्ट नहीं होती, तब तक सुनवाई जारी रहेगी।
सुनवाई के दौरान ‘जस्टिस डिले इज जस्टिस डिनाइड’ शीर्षक हिस्से पर भी चर्चा हुई। अदालत ने कहा कि इस तरह की प्रस्तुति से न्यायपालिका की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस प्रकरण में जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
इस पूरे मामले ने शिक्षा सामग्री की गुणवत्ता और संवेदनशील विषयों की प्रस्तुति को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजरें 11 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।