Delhi Riots Case: उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं

Delhi Riots Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी अगले एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे। हालांकि, अदालत ने इसी केस में शामिल पांच अन्य आरोपियों को 12 सख्त शर्तों के साथ जमानत दे दी है।

यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने 10 दिसंबर को आरोपियों और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

Delhi Riots Case: कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद का लगातार कारावास आवश्यक नहीं है, इसलिए उन्हें सशर्त जमानत दी जा रही है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एक वर्ष के भीतर गवाही पूरी नहीं होती है, तो आरोपी निचली अदालत में दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उमर खालिद को अपनी बहन के निकाह में शामिल होने के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट से 16 दिसंबर से 29 दिसंबर तक अंतरिम जमानत दी गई थी। अंतरिम रिहाई के दौरान खालिद पर कड़ी शर्तें लगाई गई थीं, जिनमें सोशल मीडिया का उपयोग न करना, किसी भी गवाह से संपर्क न करना और केवल परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों व करीबी दोस्तों से मिलने की अनुमति शामिल थी। उन्हें 29 दिसंबर की शाम तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था।

Delhi Riots Case: क्या है पूरा मामला

दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप है कि फरवरी 2020 में दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रचने में खालिद की अहम भूमिका थी। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद के साथ शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर भी साजिशकर्ता होने का आरोप है।

फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई थी और करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा की शुरुआत नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी, जो बाद में कई इलाकों में बेकाबू हो गई।

पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि 2020 की हिंसा कोई आकस्मिक सांप्रदायिक घटना नहीं थी, बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के उद्देश्य से रचा गया एक सुनियोजित और सुविचारित षड्यंत्र था।

 

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