Vaishali News: वैशाली में पुलिस की छापेमारी पर सवाल, करोड़ों के जेवर और नकदी गायब

Vaishali News: वैशाली (बिहार) से सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। चोरी की जांच के लिए निकली पुलिस टीम पर ही जब्त किए गए करोड़ों के कीमती सामान को गायब करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला लालगंज थाना क्षेत्र का है, जहां छापेमारी के दौरान बरामदगी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

छापेमारी से शुरू हुआ विवाद

यह मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव से जुड़ा है। 30 दिसंबर 2025 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के रहने वाले रामप्रीत सहनी के घर में चोरी का सामान छिपाकर रखा गया है। इसी सूचना के आधार पर लालगंज थानाध्यक्ष, पुलिस निरीक्षक संतोष कुमार के नेतृत्व में एक टीम ने रामप्रीत सहनी के घर पर छापेमारी की।

पुलिस की ओर से दावा किया गया कि छापेमारी के दौरान तीन टीवी, तांबे और अन्य मेटल के बर्तन तथा कुछ कारतूस बरामद किए गए। यही सामान जब्ती सूची में दर्ज किया गया और कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई। शुरुआती तौर पर यह कार्रवाई एक सामान्य चोरी के मामले जैसी लग रही थी।

रिश्तेदारों और गांववालों के गंभीर आरोप

मामला तब तूल पकड़ गया जब आरोपी के रिश्तेदार गेना लाल साहनी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि छापेमारी के दौरान पुलिस को सिर्फ टीवी और बर्तन ही नहीं, बल्कि 50 से 60 लाख रुपये नकद, करीब 2 किलो सोना और लगभग 6 किलो चांदी भी मिली थी। आरोप है कि यह सारा कीमती सामान जानबूझकर जब्ती सूची में दर्ज नहीं किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गांव के कई लोगों ने भी इन आरोपों की पुष्टि की। गांववालों का कहना है कि उन्होंने अपनी आंखों से पुलिस अधिकारियों को भारी मात्रा में कीमती सामान ले जाते हुए देखा। इन बयानों के बाद यह मामला सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि एक गंभीर पुलिसिया भ्रष्टाचार का आरोप बन गया।

एसपी तक पहुंचा मामला, हाई-लेवल जांच शुरू

गांववालों और परिजनों की शिकायत सीधे वैशाली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ललित मोहन शर्मा तक पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तत्काल संज्ञान लिया और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में ही कई अनियमितताओं के संकेत मिलने लगे।

इसके बाद एसपी ललित मोहन शर्मा ने कड़ा कदम उठाते हुए लालगंज थानाध्यक्ष संतोष कुमार और सब-इंस्पेक्टर सुमन झा को निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया। पुलिस विभाग के भीतर इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।

एसपी का सख्त संदेश

एसपी ने साफ शब्दों में कहा है कि विभागीय जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह पुलिस का अधिकारी ही क्यों न हो।

पुलिस की छवि पर सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचेगा। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि सच्चाई क्या है और दोषी कौन।

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