Purnia Medical College Scam: बिहार के पूर्णिया मेडिकल कॉलेज से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। दिव्यांगता कोटे से एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले आठ छात्रों के प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। पटना स्थित IGIMS की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट ने इस घोटाले पर मुहर लगाई है, जिसके बाद पुलिस अब मामला आर्थिक अपराध इकाई को सौंपने की तैयारी कर रही है।
Purnia Medical College Scam: IGIMS मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा
नामांकन के लिए पहुंचे छात्र कार्तिक यादव के दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर IGIMS पटना की तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने बेरा जांच कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि कार्तिक की सुनने की क्षमता सामान्य श्रेणी में है, जबकि जिस प्रमाण पत्र के आधार पर वह दाखिले के लिए आया था, उसमें उसे 44 प्रतिशत श्रवण दिव्यांग बताया गया था।
FIR के बाद कोर्ट के निर्देश पर कराई गई जांच
Purnia Medical College Scam: मामले में पूर्णिया मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पहले ही कार्तिक यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर उसे IGIMS भेजकर दोबारा मेडिकल परीक्षण कराया गया। ENT, न्यूरोलॉजी और PMR विशेषज्ञों की संयुक्त जांच के बाद मेडिकल बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि दिव्यांगता का दावा गलत है।
Purnia Medical College Scam: दो साल तक नहीं हुई प्रमाण पत्रों की पुष्टि
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 में MBBS की 100 सीटों की मान्यता मिलने के बाद कॉलेज में दिव्यांग कोटे से दाखिले हुए, लेकिन दो वर्षों तक किसी भी छात्र के प्रमाण पत्रों का औपचारिक सत्यापन नहीं कराया गया। इस दौरान कार्यभार संभालने वाले तीन प्राचार्यों में से किसी ने भी संबंधित संस्थानों से दस्तावेज़ों की पुष्टि नहीं कराई।
आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी जा सकती है जांच
अब तक आठ छात्रों के दस्तावेज़ संदिग्ध पाए जाने के बाद पुलिस इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को भेजने की तैयारी में है। राज्य में इस तरह के मामलों की जांच की जिम्मेदारी EOU को दी जाती है, इसलिए आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
सात अन्य छात्रों के नाम भी आए सामने
कार्तिक यादव के अलावा जिन छात्रों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं, उनमें मो. शाहबुद्दीन, फरहत शमीम, अजीत कुमार, मोहसिन फहीम, मो. अतील अजहर, मो. रसीद अहमद और मुद्दसिर गयाजी शामिल हैं। सभी मामलों की अलग-अलग जांच की जा रही है।
गिरफ्तार कुणाल पर फर्जीवाड़े का नेटवर्क खड़ा करने का आरोप
पुलिस ने कार्तिक के साथ-साथ उसके सहयोगी कुणाल कुमार को भी गिरफ्तार किया है। वह गया मेडिकल कॉलेज का छात्र बताया जा रहा है। आरोप है कि कुणाल ने ही कार्तिक को दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने की योजना समझाई।
छापेमारी में कई क्रेडिट कार्ड और मोबाइल बरामद
जांच के दौरान कुणाल के पास से कई बैंकों के क्रेडिट कार्ड, दो आईफोन, ड्राइविंग लाइसेंस और अलग-अलग संस्थानों के पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। इनमें एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कार्ड भी शामिल हैं। वह सीतामढ़ी जिले के पुनौरा थाना क्षेत्र का निवासी बताया गया है।
महाराष्ट्र से जारी UDID कार्ड भी जांच के घेरे में
पुलिस के मुताबिक कार्तिक यादव का UDID कार्ड महाराष्ट्र से जारी हुआ था, जिसमें उसे 44 प्रतिशत श्रवण दिव्यांग बताया गया था। यह कार्ड 21 अगस्त 2025 को बना था और इसी के आधार पर गोवा मेडिकल कॉलेज से 30 सितंबर 2025 को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत किया गया था। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया कुणाल के जरिए कराई गई।