पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव: जंग हुई तो किस देश की सेना पड़ेगी भारी?

Pakistan:  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से तालिबान सरकार के खिलाफ सख्त बयान के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी आ गई है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर हालात युद्ध तक पहुंचते हैं तो सैन्य ताकत के मामले में कौन सा देश आगे रहेगा।

 

हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। इस कार्रवाई की पुष्टि दोनों देशों ने की है। तालिबान प्रशासन का कहना है कि हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ, जबकि पाकिस्तानी मीडिया और सरकारी सूत्रों का दावा है कि इन हमलों में 72 तालिबान लड़ाके मारे गए।

 

Pakistan: सैन्य ताकत में बड़ा अंतर

 

सैनिक संख्या की बात करें तो पाकिस्तान इस मामले में काफी मजबूत स्थिति में है। पाकिस्तान के पास करीब 6.60 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि रिजर्व बलों को शामिल करने पर यह संख्या लगभग 17 लाख तक पहुंच जाती है। दूसरी ओर, तालिबान के पास 1.65 लाख से 1.72 लाख सक्रिय लड़ाके हैं और कुल संख्या रिजर्व सहित करीब दो लाख तक मानी जाती है। यानी सैनिक संख्या के लिहाज से पाकिस्तान को स्पष्ट बढ़त हासिल है।

 

जमीन पर हथियारों की ताकत

 

पाकिस्तानी सेना के पास आधुनिक सैन्य संसाधनों का बड़ा जखीरा है। उसके पास करीब 2,677 टैंक, 59,000 से अधिक बख्तरबंद वाहन, 6,000 से ज्यादा आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल (AFV) और लगभग 4,600 तोपें मौजूद हैं।

 

इसके मुकाबले तालिबान के पास सीमित सैन्य उपकरण हैं। उनके पास कुछ Humvee वाहन हैं, जिन्हें अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से वापसी के दौरान छोड़ गई थी। अफगानिस्तान के पास अनुमानित 100 से 200 पुराने टैंक हैं, जिनकी हालत भी बेहतर नहीं मानी जाती।

 

हवाई शक्ति में भी पाकिस्तान आगे

 

वायुसेना के मामले में भी पाकिस्तान काफी मजबूत है। उसके पास कुल 1,399 विमान हैं, जिनमें 400 से ज्यादा फाइटर जेट शामिल हैं। वहीं तालिबान की हवाई क्षमता बेहद सीमित है — अफगानिस्तान के पास केवल करीब 9 पुराने विमान और लगभग 23 हेलीकॉप्टर ही बताए जाते हैं।

 

फिर भी आसान नहीं होगी जंग

 

हालांकि सैन्य संसाधनों और आधुनिक हथियारों के आधार पर पाकिस्तान मजबूत नजर आता है, लेकिन पहाड़ी भूगोल और गुरिल्ला युद्ध में तालिबान का अनुभव किसी भी संभावित संघर्ष को कठिन और लंबा बना सकता है। इसलिए यदि युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो परिणाम केवल सैन्य ताकत से तय होना आसान नहीं होगा।

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