Delhi: दिल्ली की राजनीति में बड़े घटनाक्रम के तहत राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर पर्याप्त ठोस साक्ष्य नहीं हैं, जिनके आधार पर आरोप तय किए जा सकें।
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
Delhi: अदालत का फैसला: साक्ष्यों के अभाव में राहत
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अदालत के अनुसार, कथित केंद्रीय साजिश को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
यह मामला 2022 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा था, जिसमें AAP सरकार पर कथित रूप से दक्षिण लॉबी से प्रभावित होकर नीति बनाने के आरोप लगे थे। सीबीआई ने इस मामले में कई चार्जशीट दाखिल की थीं।
AAP ने बताया ‘सत्य की जीत’, पीएम से मांगी माफी
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें शराब घोटाले में फंसाने की कोशिश की जा रही थी। पार्टी नेताओं ने इसे “राजनीतिक साजिश के खिलाफ बड़ी जीत” बताया।
AAP ने आरोप लगाया कि उनके नेताओं को जेल में प्रताड़ित किया गया और प्रधानमंत्री से देश से माफी मांगने की मांग की।
भाजपा की प्रतिक्रिया: “तकनीकी आधार पर फैसला”
दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में साक्ष्यों के अभाव की बात कही है, जबकि जांच एजेंसी लगातार यह कहती रही है कि सबूतों को नष्ट किया गया। उन्होंने सिम कार्ड और मोबाइल फोन नष्ट किए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि इनका पूरा विवरण आज तक सामने नहीं आया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है और निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि सीबीआई इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है और फैसले का विस्तृत अध्ययन करने के बाद पार्टी औपचारिक प्रतिक्रिया देगी।
सियासी असर: आगे की रणनीति पर नजर
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के बाद भाजपा रणनीतिक मंथन में जुटी है। पार्टी के भीतर अपील दायर करने, मीडिया अभियान चलाने और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर फोकस बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से ऐसी किसी रणनीति की पुष्टि नहीं की गई है।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर आने वाले चुनावों, विशेषकर पंजाब की राजनीति पर भी पड़ सकता है, जहां AAP इस मुद्दे को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर सकती है।
आगे क्या?
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, एजेंसी फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही है।
दिल्ली शराब नीति मामला अब कानूनी दायरे से निकलकर एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया है, जहां दोनों प्रमुख दल अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं।