India: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। फिलहाल क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल चल रही है। इसी कारण संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की सलाह दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने 5 मार्च से 4 अप्रैल तक के लिए भारत को सीमित छूट दी है, ताकि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां उन रूसी तेल कार्गो को खरीद सकें, जो नए प्रतिबंध लागू होने से पहले ही लोड होकर रास्ते में थे।
इसी कारण रूस से आयात होने वाले तेल पर लगने वाली 25% टैरिफ पेनल्टी से भी अस्थायी राहत मिल सकती है।
India: सीमित समय की राहत का असर कितना?
भारतीय कंपनियों ने रूस से करीब 10 मिलियन बैरल से ज्यादा क्रूड ऑयल खरीदा है। यह फैसला भारत के लिए राहत भरा लग सकता है। इसके अलावा लगभग 15 मिलियन बैरल तेल भारतीय समुद्री क्षेत्र के आसपास और करीब 7 मिलियन बैरल सिंगापुर के पास मौजूद है।
कुछ टैंकर तो भूमध्य सागर और स्वेज नहर के रास्ते भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि विश्लेषकों के मुताबिक यह मात्रा भारत की जरूरतों के मुकाबले काफी कम है।
जरूरतें बहुत बड़ी
भारत हर दिन लगभग 5 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल का इस्तेमाल करता है। ऐसे में फंसे हुए कार्गो से मिलने वाला तेल उतनी ही तेजी से खत्म हो सकता है, जितनी तेजी से वह भारत पहुंचेगा।
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत के लिए एक बड़ा सप्लायर बनकर उभरा था। एक समय पर भारत के कुल तेल आयात का लगभग 35% हिस्सा रूस से आता था। हालांकि हाल के महीनों में यह हिस्सा घटकर करीब 20–25% रह गया है।