Kishanganj Army Camp: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah का तीन दिवसीय सीमांचल दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े रणनीतिक मिशन के रूप में सामने आया है। किशनगंज (Kiashanganj Army Camp) के जिला परिषद स्थित ‘मेची सभागार’ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में साफ संकेत दिया गया कि केंद्र सरकार अब इस संवेदनशील इलाके को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
बैठक का सबसे अहम मुद्दा कोचाधामन, बहादुरगंज और नटुआपारा में प्रस्तावित सेना के बेस कैंपों का रहा। लंबे समय से लंबित भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर गृह मंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट जवाब तलब किया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
Kishanganj Army Camp: रणनीतिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम
कोचाधामन, बहादुरगंज और नटुआपारा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान हैं। यहां सेना की मौजूदगी से न केवल सीमा पार की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा सकेगी, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में सेना की त्वरित तैनाती सुनिश्चित होगी।
स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध को देखते हुए गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि प्रशासन ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित करे, उनकी आशंकाओं को दूर करे और मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर कार्य में तेजी लाए।
Kishanganj Army Camp: ‘चिकन नेक’ पर विशेष रणनीति
किशनगंज (Kishanganj Army Camp) का इलाका Siliguri Corridor के बेहद करीब है, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है। यह मात्र 20-22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि इस क्षेत्र में केवल फिजिकल पेट्रोलिंग पर्याप्त नहीं है। यहां ‘डिजिटल फेंसिंग’, अत्याधुनिक ड्रोन सर्विलांस और मजबूत ह्यूमन इंटेलिजेंस नेटवर्क विकसित किया जाए, ताकि सीमा पार की हर गतिविधि की जानकारी रियल-टाइम में मुख्यालय तक पहुंचे।
अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता
बैठक में Sashastra Seema Bal (SSB) और Land Ports Authority of India (LPAI) के अधिकारियों के साथ सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ पर विस्तृत चर्चा हुई।
गृह मंत्री ने सीमावर्ती इलाकों में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव की खबरों पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए। साथ ही रक्सौल और जोगबनी जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया गया, ताकि वैध व्यापार को बढ़ावा मिले और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगे।
Kishanganj Army Camp: ड्रग्स और जाली नोट नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
नेपाल सीमा की खुली व्यवस्था का फायदा उठाकर सक्रिय नार्को-टेररिज्म और जाली नोट सिंडिकेट पर भी बैठक में कड़ा रुख अपनाया गया। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक साझा कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिससे अपराध नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।
बुधवार रात किशनगंज के माता गुजरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में विश्राम के दौरान भी गृह मंत्री ने स्थानीय प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। उनका यह दौरा स्पष्ट संदेश देता है कि सीमांचल अब केवल राजनीतिक विमर्श का विषय नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर है।