सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में दो दोषी, छह बरी

बिहार के पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया है। कोर्ट में पूर्व विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई ।वहीं पूर्व सांसद सूरजभान सिंह राजन तिवारी समेत 6 आरोपियों को बरी कर दिया ।

पटना हाई कोर्ट का पूर्व फैसला, रामा देवी की प्रतिक्रिया

पटना हाई कोर्ट ने 2024 में सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया था। बृज बिहारी प्रसाद की पत्नी और भाजपा नेता रामादेवी तथा सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी । सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 21 और 22 अगस्त को सुनवाई पूरी की और निर्णय सुरक्षित रखा । सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बृज बिहारी प्रसाद की पत्नी रमा देवी मैं खुशी जाहिर की और फोटो एवं सरकार को धन्यवाद दिया । उन्होंने यह भी कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने इस मामले में तत्परता से काम किया है।

 आख़िर कैसे हुई थी हत्या

पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या 1998 में उसे समय की गई जब वह आइजीआइएमएस में इलाज के लिए भर्ती थे। निचली अदालत ने 2009 में 8 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

 क्या है इसके राजनीतिक प्रभाव

बृज बिहारी प्रसाद की हत्या के बाद उनकी पत्नी रमा देवी ने भाजपा का दामन थाम लिया और वह  शिवहर लोकसभा से सांसद रह चुकी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने राम देवी का टिकट काट दिया था

ट्रायल और हाई कोर्ट की राहत

बड़े हत्याकांड का मामला पटना से लेकर दिल्ली तक चर्चा में रहा । पटना के सिविल कोर्ट में लंबे ट्रायल के बाद 12 अगस्त 2009 को सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाई कोर्ट ने अपील की थी ।

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

पटना हाईकोर्ट के फैसले से रमा देवी असंतुष्ट थीं, इसीलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आर. माधवन की पीठ ने सबूतों के अभाव में आरोपियों के बरी होने की सुनवाई की। इस मामले में सीबीआई ने भी अपना पक्ष रखा, क्योंकि हत्या के बाद हुए बवाल के कारण राज्य सरकार ने केस की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी थी।

 

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