Turkman Gate Violence: दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में मंगलवार रात अतिक्रमण हटाने को लेकर हुई हिंसक झड़प ने एक बार फिर राजधानी में अवैध कब्जों और धार्मिक स्थलों से जुड़े भूमि विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। इस घटना के पीछे की कहानी कई महीनों से अदालतों और सरकारी फाइलों में चल रही थी, जो अब सड़क पर टकराव के रूप में सामने आई।
मामला सैयद फैज इलाही मस्जिद से सटी जमीन से जुड़ा है। नगर निगम (एमसीडी) की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए अचानक पथराव शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जबकि अब तक 5 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ नवंबर 2025 में आए दिल्ली हाईकोर्ट के एक अहम आदेश से जुड़ी है। हाईकोर्ट ने तुर्कमान गेट स्थित रामलीला मैदान के पास करीब 39,000 वर्ग फुट जमीन से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने एमसीडी और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से कहा था कि इलाके में बनी सड़क, फुटपाथ, बैंक्वेट हॉल, पार्किंग और एक प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर जैसी संरचनाओं को हटाया जाए।
कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी ने इलाके में मौजूद ढांचों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। इसी दौरान मस्जिद से सटी जमीन को लेकर विवाद और गहराता चला गया।
Turkman Gate Violence: मस्जिद कमेटी की दलील
मस्जिद प्रबंध समिति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। समिति का दावा है कि संबंधित जमीन नोटिफाइड वक्फ प्रॉपर्टी है और इस पर सुनवाई का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को है। कमेटी ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से दिल्ली वक्फ बोर्ड को लीज रेंट का भुगतान करते आ रहे हैं।
कमेटी का कहना है कि बैंक्वेट हॉल और प्राइवेट क्लीनिक को पहले ही बंद कर दिया गया है और उन्हें इन पर कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मुख्य आपत्ति मस्जिद से सटे कब्रिस्तान को लेकर है, जिसे वे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बता रहे हैं।
Turkman Gate Violence: एमसीडी का पक्ष
एमसीडी ने अदालत में साफ किया कि वर्ष 1940 में केवल 0.195 एकड़ जमीन ही मस्जिद के लिए लीज पर दी गई थी। मस्जिद से सटी बाकी जमीन पर कब्जे के कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। दिसंबर में एमसीडी ने घोषणा की थी कि 0.195 एकड़ से बाहर मौजूद सभी ढांचे अवैध हैं और उन्हें हटाया जाएगा।
जब एमसीडी के अधिकारी अतिक्रमित जमीन को मार्क करने पहुंचे, तभी स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
अदालत में अगली सुनवाई
मस्जिद कमेटी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी, शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली वक्फ बोर्ड से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।
कार्रवाई के दौरान हिंसा
मंगलवार रात एमसीडी की टीम करीब 30 बुलडोजर और 50 डंपर ट्रकों के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस के मुताबिक, करीब 25 से 30 लोगों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। जवाब में पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
इस कार्रवाई के दौरान एक डिस्पेंसरी और एक बैंक्वेट हॉल को तोड़ा गया। झड़प में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने घायल कर्मचारियों और एमसीडी कर्मियों के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच जारी है।
फिलहाल तुर्कमान गेट इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।