अमेरिका में Mithila Makhana का डंका, 25 ग्राम मखाना चार डॉलर में

Mithila Makhana: आज के समय में मखाना एक सुपरफूड के रूप में दुनिया भर में पहचान बना चुका है। बिहार के मिथिला क्षेत्र में उगने वाला मखाना अब सिर्फ देसी थाली तक सीमित नहीं, बल्कि विदेशी सुपरमार्केट की शेल्फ़ पर भी प्रीमियम प्रोडक्ट बन गया है। अमेरिका में Mithila Makhana की कीमतों में हाल के महीनों में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार का ध्यान इस पारंपरिक भारतीय सुपरफूड की ओर खींचा है।

Mithila Makhana: करीब 360 रुपये में 25 ग्राम मखाना

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 25 ग्राम मखाना का पैक, जो पहले करीब 2 डॉलर में उपलब्ध था, अब 4 डॉलर तक बिक रहा है। कीमतों में इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह भारतीय उत्पादों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क बताए जा रहे हैं। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी उपभोक्ताओं का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है, लेकिन इसके बावजूद Mithila Makhana की मांग में कमी नहीं आई है।

Mithila Makhana: अमेरिका में क्यों महंगा हुआ मखाना

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आयात पर लगाए गए करीब 50 प्रतिशत टैरिफ के चलते अमेरिका भेजे जाने वाले कई उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ है। कुछ भारतीय निर्यातकों की अमेरिका जाने वाली खेप में लगभग 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद मखाना जैसे प्रीमियम और हेल्थ-फोकस्ड प्रोडक्ट ने अपनी जगह बनाए रखी है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारतीय मखाना निर्यातकों ने हालात को भांपते हुए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाश लिए हैं। अमेरिका में रहने वाले कोलकाता मूल के एक भारतीय व्यापारी ने बताया कि महामारी से पहले उनका मासिक किराना खर्च करीब 500 डॉलर था, जो अब बढ़कर 900 डॉलर तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी में मखाना जैसी हेल्दी चीज़ों की कीमतों का बड़ा योगदान है।

Mithila Makhana: दुनियाभर में मखाने की मांग

संकट के बीच उम्मीद की किरण भी दिख रही है। Mithila Makhana की मांग अब स्पेन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य यूरोपीय देशों में तेज़ी से बढ़ रही है। इन बाजारों में न सिर्फ भारतीय प्रवासी, बल्कि स्थानीय उपभोक्ता भी मखाने के स्वास्थ्य लाभों को लेकर जागरूक हो रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 800 मीट्रिक टन मखाने का निर्यात जर्मनी, चीन, अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में किया। इसमें अकेले अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि Mithila Makhana अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत का एक मजबूत ब्रांड बनकर उभर रहा है।

Mithila Makhana: मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा

शक्ति सुधा एग्रो वेंचर्स के सत्यजीत सिंह, जिनकी कंपनी भारत के कुल मखाना निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालती है, कहते हैं, “यह सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मखाना मुख्य रूप से भारतीय प्रवासियों तक सीमित है, लेकिन इसकी संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। घरेलू और विदेशी—दोनों बाजारों में इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।”

इस दिशा में सरकार भी सक्रिय हुई है। केंद्र सरकार ने हाल ही में मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है, जिसके लिए शुरुआती तौर पर 1 अरब रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद वैल्यू चेन को संगठित करना, किसानों को प्रशिक्षण देना, गुणवत्ता मानक तय करना और निर्यात को बढ़ावा देना है।

Mithila Makhana: मखाना के लिए दरभंगा फेमस

भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, बिहार देश के मखाना उत्पादन की रीढ़ है, जहां से करीब 85 प्रतिशत राष्ट्रीय उत्पादन होता है। दरभंगा अब Mithila Makhana की खेती और प्रोसेसिंग का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।

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