Dog Travel To Australia: विदेश शिफ्ट होना अक्सर सपनों से जुड़ा होता है, लेकिन हैदराबाद के इस कपल के लिए यह सफर सिर्फ करियर या नई शुरुआत तक सीमित नहीं था। उनके लिए सबसे बड़ा सवाल था- अपने पालतू डॉग स्काई को साथ कैसे ले जाएं।
ऑस्ट्रेलिया जाना आसान, लेकिन स्काई को ले जाना सबसे बड़ी चुनौती। ऑस्ट्रेलिया जाना अपने आप में आसान नहीं था, लेकिन असली चुनौती स्काई को साथ ले जाने की थी। ऑस्ट्रेलिया के एनिमल इंपोर्ट नियम दुनिया के सबसे सख्त माने जाते हैं और भारत से सीधे किसी डॉग को वहां ले जाने की अनुमति नहीं है।
नियमों के मुताबिक, कुत्ते को पहले किसी ऐसे देश में कम से कम छह महीने रहना होता है, जो रेबीज-फ्री हो।
15 लाख रुपये आया खर्च
Dog Travel To Australia: इसी वजह से स्काई को भारत से दुबई भेजा गया, जहां उसे एक विशेष बोर्डिंग सेंटर में रखा गया। मेडिकल टेस्ट, वैक्सीनेशन, डॉक्यूमेंटेशन और ट्रैवल—इन सब पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हो गए।
साथ रहते हुए भी दूरियां
स्काई को अकेला छोड़ने से पहले कपल ने एक महीना दुबई में उसके साथ बिताया, ताकि वह नए माहौल में सहज हो सके। इसके बाद शुरू हुई सबसे मुश्किल परीक्षा- छह महीने की दूरी।
हर दिन वीडियो कॉल, फोटो और हेल्थ अपडेट्स मिलते रहे, लेकिन स्क्रीन के उस पार का प्यार असली साथ का विकल्प नहीं हो सकता।
जब इंतज़ार खत्म हुआ
छह महीने बाद जब स्काई आखिरकार ऑस्ट्रेलिया पहुंचा, तो सारी थकान और चिंता एक पल में गायब हो गई। कपल का कहना है, “पैसा फिर कमाया जा सकता है, लेकिन परिवार को छोड़ा नहीं जा सकता। स्काई हमारा पालतू नहीं, हमारा बच्चा है।”
सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं
जैसे ही यह कहानी सोशल मीडिया पर सामने आई, लोगों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। किसी ने लिखा, “पालतू जानवर भी परिवार होते हैं।” तो किसी ने कहा, “जिसे जानवरों से इतनी मोहब्बत हो, वो इंसान कभी बुरा नहीं हो सकता।”