India: भारत को जल्द ही तेल और गैस का बड़ा खजाना मिलने की उम्मीद है। देश अंडमान सागर में परिवर्तनकारी तेल और गैस की खोज में जुटा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज वैसी ही हो सकती है जैसी हेस कॉर्पोरेशन और CNOOC द्वारा गुयाना में की गई विशाल खोज थी।
यदि अंडमान में चल रही यह खोज सफल होती है, तो भारत की 3.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में तेजी से बढ़कर 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
India: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तेल और गैस की खोज फिर से शुरू
भारत जल्द ही तेल और गैस की खोज में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है, क्योंकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अंडमान बेसिन में लगभग चार लाख वर्ग किलोमीटर का ऑफशोर क्षेत्र तेल और गैस की खोज के लिए फिर से खोल दिया गया है।
पहले डिफेंस लॉन्च कॉरिडोर से जुड़ी पाबंदियों के कारण इस इलाके में दशकों तक ऑफशोर ड्रिलिंग पर रोक लगी हुई थी। लेकिन अब लगभग चार लाख वर्ग किलोमीटर का यह नो-गो ज़ोन खाली कर दिया गया है और तेल की खोज दोबारा शुरू कर दी गई है।
तेल और गैस की खोज भारत के लिए लॉटरी जीतने जैसी
फिलहाल भारत अपनी जरूरत के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लेकिन अंडमान जैसे फ्रंटियर बेसिन में बड़े भंडार मिलने का मतलब भारत के लिए किसी लॉटरी जीतने जैसा हो सकता है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की भी बड़ी बचत होगी।
भारत अंडमान सागर में एक परिवर्तनकारी तेल भंडार की खोज के कगार पर है। यह खोज हेस कॉर्पोरेशन और CNOOC द्वारा गुयाना में की गई विशाल खोज के समान मानी जा रही है। गुयाना के पास लगभग 11.6 बिलियन बैरल तेल और गैस का भंडार है और तेल भंडार के मामले में यह दुनिया में 17वें स्थान पर है।