भारत में बन रहा “हांगकांग जैसा प्रोजेक्ट”, चीन की घेराबंदी में मदद करेगा

India: केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को तेज कर दिया है। करीब 83,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2021 में हुई थी। अब इस परियोजना को लेकर कांग्रेस ने विरोध जताते हुए पर्यावरण और स्थानीय आदिवासियों पर संभावित खतरे की बात कही है।

यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि से लगभग 1,800 किलोमीटर दूर, बंगाल की खाड़ी में स्थित है। इसी द्वीप पर भारत का दक्षिणतम बिंदु इंदिरा प्वाइंट भी मौजूद है, जो इंडोनेशिया के बड़े द्वीप सुमात्रा से करीब 170 किलोमीटर दूर है।

India: रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम मान रही है। इस योजना के तहत मालवाहक जहाजों के लिए एक बड़ा बंदरगाह, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और करीब 450 मेगावॉट क्षमता की गैस व सौर ऊर्जा परियोजना विकसित की जाएगी।

ग्रेट निकोबार द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। यही वह समुद्री रास्ता है, जहां से हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बड़ी संख्या में जहाजों की आवाजाही होती है।

चीन की घेराबंदी में मदद

अगर देखा जाए तो इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह प्रोजेक्ट भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि इस परियोजना के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।

यह परियोजना नीति आयोग की एक रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। ग्रेट निकोबार की लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कोलंबो, पोर्ट क्लांग और सिंगापुर से लगभग समान दूरी पर स्थित है।

इसी वजह से इसे भविष्य में एक बड़े ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

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