Iran: ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका की तेल नीति के बदलते रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस अमेरिका ने पहले कई देशों, खासकर भारत, पर रूस से तेल आयात बंद करने का दबाव बनाया था, वही अब वैश्विक तेल संकट के समय रूस से कच्चा तेल खरीदने की अपील कर रहा है।
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
ऐसे में अमेरिका अब उन देशों से रूसी तेल खरीदने की गुजारिश कर रहा है, जिन्हें पहले इससे दूर रहने की चेतावनी दी गई थी।
Iran: यूरोप की भी आलोचना
मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यूरोप की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान के खिलाफ चल रहे कथित “अवैध युद्ध” का समर्थन किया, इस उम्मीद में कि इसके बदले अमेरिका रूस के खिलाफ जाकर उनका साथ देगा। उनके मुताबिक यह रुख बेहद शर्मनाक है।
रूसी तेल खरीदने की छूट
अमेरिका ने हाल ही में 30 दिन की छूट देते हुए कहा था कि जिन तेल कार्गो को पहले से जहाजों पर लोड किया जा चुका है और जो समुद्र में फंसे हुए हैं, उन देशों को प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी जाएगी।
अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक यह अनुमति केवल उन तेल कार्गो के लिए है जो 12 मार्च तक जहाजों पर लोड किए जा चुके थे। यह छूट 11 अप्रैल तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखना और कीमतों को नियंत्रित करना बताया गया है।
भारत के जहाजों को सुरक्षित मार्ग
ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच खबर है कि ईरान ने भारत के झंडे वाले दो एलपीजी जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी Reuters के अनुसार, सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर जा रहा एक टैंकर भी इस मार्ग से गुजरने के बाद भारत पहुंचने की उम्मीद है।
ईरान में भारत के राजदूत Mohammad Fathali ने कहा कि क्षेत्र में तनाव के बावजूद तेहरान भारत के जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। इसलिए भारत की ओर जाने वाले जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा।