Reporter Diaries Special: मिथिलांचल की पवित्र धरती पर स्थित दरभंगा जिले के मकरमपुर गांव का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर (Makrampur Bajrangbali Sthan) सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों-लाखों लोगों की आस्था, विश्वास और सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं इतनी अनोखी हैं कि पहली बार यहां आने वाला हर श्रद्धालु इसकी कहानी सुनकर हैरान रह जाता है। यही वजह है कि हर साल यहां आयोजित होने वाले ध्वजा पर्व का इंतजार पूरे इलाके के लोग बेसब्री से करते हैं। इस वर्ष भी यह ऐतिहासिक ध्वजा पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के बीच विधिवत संपन्न हो गया।
भोर की पहली किरण फूटने से पहले ही मंदिर परिसर भक्तों से भरने लगा था। “जय श्रीराम” और “बजरंगबली की जय” के गगनभेदी जयघोष से पूरा मकरमपुर गांव भक्तिमय वातावरण में डूब गया। दरभंगा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों और जिलों से हजारों श्रद्धालु हाथों में ध्वजा लेकर मंदिर पहुंचे। महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों की लंबी कतारें मंदिर के बाहर तक दिखाई दे रही थीं।
स्थानीय लोगों के अनुसार मकरमपुर हनुमान मंदिर (Makrampur Bajrangbali Sthan) में ध्वजा चढ़ाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से बजरंगबली के चरणों में ध्वजा अर्पित करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है और परिवार पर हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने के बाद हर वर्ष यहां ध्वजा चढ़ाने आते हैं। यही विश्वास इस पर्व को पूरे मिथिलांचल के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल करता है।
ध्वजा पर्व के अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। रंग-बिरंगी ध्वजाओं, फूलों और रोशनी से सजे मंदिर की भव्यता देखते ही बन रही थी। सुबह विशेष पूजा-अर्चना और मंगल आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद पूरे दिन सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा और भजन-कीर्तन का आयोजन चलता रहा। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच जब महाआरती हुई तो पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया।

ध्वजा चढ़ाने की प्रक्रिया पूरे आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही। श्रद्धालु अपनी-अपनी ध्वजा लेकर मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से बजरंगबली को अर्पित किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी। कई लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और जीवन में सफलता की कामना करते नजर आए, जबकि कई श्रद्धालुओं ने पूरी हुई मन्नत के लिए बजरंगबली का आभार भी व्यक्त किया।
पूरे दिन मंदिर परिसर और उसके आसपास मेले जैसा दृश्य बना रहा। प्रसाद, पूजा सामग्री, खिलौनों और मिठाइयों की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी। बच्चों के लिए झूले और अन्य आकर्षण भी लोगों का ध्यान खींचते रहे। गांव के लोगों ने बाहर से आए श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे पूरा आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सामाजिक मेल-मिलाप का भी केंद्र बन गया।
मंदिर समिति और ग्रामीणों ने आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद वितरण, बैठने की व्यवस्था और साफ-सफाई का विशेष इंतजाम किया गया। स्वयंसेवक पूरे दिन व्यवस्था संभालते रहे ताकि दर्शन और पूजा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि मकरमपुर का ध्वजा पर्व केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान भी है। वर्षों से यह आयोजन लोगों को एक सूत्र में बांधता आया है। नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग ले रही है, जिससे यह परंपरा लगातार मजबूत होती जा रही है।
मकरमपुर का यह प्रसिद्ध हनुमान मंदिर आज भी मिथिलांचल में अटूट विश्वास, चमत्कारिक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम बना हुआ है। हर साल आयोजित होने वाला ध्वजा पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था की वह डोर है जो हजारों श्रद्धालुओं को बजरंगबली के चरणों से जोड़ती है।