ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर कब जागेंगे जनप्रतिनिधि? मकरमपुर के मुख्य द्वार पर वर्षों से जलजमाव

Darbhanga News: अगर किसी गांव की पहचान उसके मुख्य द्वार से होती है, तो बेनीपुर प्रखंड का मकरमपुर गांव आज भी बदहाली की पहचान बन चुका है। गांव में प्रवेश करते ही विकास के दावों की हकीकत सामने आ जाती है। मुख्य सड़क पर वर्षों से जलजमाव की ऐसी समस्या है कि हल्की बारिश भी पूरे रास्ते को तालाब में बदल देती है। करीब 40 से 50 मीटर तक सड़क पानी में डूब जाती है और गांव में आने-जाने वाला हर व्यक्ति इसी गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर होता है।

हैरानी की बात यह है कि यह समस्या एक-दो महीने या एक-दो साल पुरानी नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि वर्षों से हालात ऐसे ही हैं। हर चुनाव में सड़क और विकास की बातें होती हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मकरमपुर का यह रास्ता नेताओं की नजरों से भी ओझल हो जाता है।

Darbhanga News: स्कूली बच्चों से लेकर मरीज तक, सभी की राह मुश्किल

यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि पूरे गांव की जीवनरेखा है। इसी रास्ते से बच्चे स्कूल जाते हैं, किसान खेतों तक पहुंचते हैं, मरीज अस्पताल जाते हैं और ग्रामीण बाजार का रुख करते हैं। लेकिन बारिश होते ही यह सड़क लोगों के लिए परेशानी का दूसरा नाम बन जाती है। कई बार दोपहिया वाहन फिसल जाते हैं, पैदल चलने वालों के कपड़े खराब हो जाते हैं और बुजुर्गों को गिरने का डर बना रहता है।

जनप्रतिनिधियों के दावों पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार मुखिया, जिला परिषद सदस्य, स्थानीय विधायक और सांसद तक पहुंचाई गई। हर बार आश्वासन मिला कि समस्या का समाधान होगा, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस है। सवाल यह है कि जब गांव के मुख्य प्रवेश द्वार की यह स्थिति है, तो विकास के दावे आखिर किस आधार पर किए जाते हैं?

Darbhanga News: समाधान मुश्किल नहीं, लेकिन इच्छाशक्ति चाहिए

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सड़क की ऊंचाई बढ़ा दी जाए और जल निकासी की समुचित व्यवस्था कर दी जाए तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। लेकिन वर्षों से यह मुद्दा सिर्फ कागजों और वादों तक ही सीमित है।

अब जवाब कौन देगा?

जब गांव में प्रवेश करने वाला हर व्यक्ति इसी जलजमाव से होकर गुजरता है, तब सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का है।

क्या मकरमपुर के लोगों को हर बरसात में इसी तरह पानी से होकर गुजरना पड़ेगा? क्या विकास सिर्फ भाषणों और चुनावी मंचों तक सीमित रहेगा? या फिर कभी कोई जनप्रतिनिधि इस गांव के मुख्य द्वार तक पहुंचकर भी देखेगा कि आखिर जनता किन हालात में जी रही है?

अब निगाहें प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधित्व का दावा करने वाले हर जिम्मेदार व्यक्ति पर हैं। क्योंकि यह सिर्फ जलजमाव नहीं, बल्कि वर्षों से विकास के इंतजार में खड़े एक गांव की कहानी है।

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