Patna Hostel Case: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। पीड़िता के पिता ने न्याय की मांग को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है, जिसमें मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की अपील की गई है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और जल्द सुनवाई शुरू होने की संभावना है।
सोमवार को हो सकती है सुनवाई
याचिका में छात्रा के पिता ने बिहार के गृह विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और निजी अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अब तक की गई जांच में कई खामियां रही हैं, इसलिए पूरे मामले (Patna Hostel Case) की निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक निगरानी आवश्यक है। इस याचिका पर सोमवार को पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ में सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारी और लोग बनाए गए प्रतिवादी
याचिका में कई वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें गृह विभाग के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, बिहार के डीजीपी, पटना के एसपी और चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी शामिल हैं।
इसके अलावा हॉस्टल मालिक श्रवण अग्रवाल, नीलम अग्रवाल, अंशु अग्रवाल, वार्डन चंचला और मकान मालिक मनीष रंजन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। छात्रा के इलाज से जुड़े अस्पताल प्रशासन और संबंधित डॉक्टरों को भी याचिका में पक्षकार बनाया गया है।
सीएम ने की सीबीआई जांच की सिफारिश
इस संवेदनशील मामले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
पिछले 23 दिनों में यह तीसरी जांच एजेंसी है जिसे मामले की जांच सौंपी गई है। इससे पहले बिहार पुलिस की एसआईटी और सीआईडी इस मामले (Patna Hostel Case) की जांच कर रही थीं, लेकिन परिजनों की असंतुष्टि के बाद अब जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।
क्या है पूरा मामला
जहानाबाद की रहने वाली नाबालिग छात्रा पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।