Bangladesh Elections से पहले हिंदू के खिलाफ हिंसा की साजिश, वोट बैंक खतरनाक प्लान

Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में फरवरी में प्रस्तावित आम चुनावों से पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर हिंसा भड़काने की एक सुनियोजित साजिश सामने आई है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, चुनावी लाभ के लिए कुछ राजनीतिक दल और नेता हिंदू विरोधी बयानबाजी को जानबूझकर हवा दे रहे हैं, ताकि धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए वोट बैंक मजबूत किया जा सके।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में हुई एक गुप्त बैठक में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़काने की रणनीति तैयार की गई। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कट्टरपंथी तत्वों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, चुनाव नजदीक आते ही हालात और बिगड़ने की आशंका है, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Bangladesh Elections 2026: विकास नहीं, हिंदू-विरोधी एजेंडा पर लड़ा जाएगा चुनाव

बांग्लादेश मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार चुनाव विकास, सुरक्षा या आर्थिक मुद्दों के बजाय हिंदू विरोधी और भारत विरोधी नैरेटिव के इर्द-गिर्द सिमट सकता है। सूत्रों के अनुसार, कुछ नेता यह प्रचार कर रहे हैं कि भारत ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण दे रखी है और देश के हिंदू समुदाय भारत समर्थक हैं, इसलिए उन्हें बांग्लादेश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

फर्जी आरोपों के जरिए माहौल बिगाड़ने की तैयारी

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि इस साजिश का अहम हिस्सा हिंदू समुदाय के खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ना भी है। चोरी और अन्य अपराधों के फर्जी आरोप लगाकर स्थानीय लोगों को भड़काने की योजना बनाई जा रही है, ताकि हिंसा को “जनाक्रोश” का रूप दिया जा सके।

Bangladesh Elections 2026: शेख हसीना और भारत बने चुनावी हथियार

चुनावी राजनीति में शेख हसीना को ‘भारत समर्थक’ और ‘बांग्लादेश विरोधी’ बताकर निशाना बनाया जा रहा है। भारत पर उन्हें शरण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि बांग्लादेश सरकार उनकी प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे को धार्मिक रंग देकर चुनावी लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

जमात-ए-इस्लामी को मिल रहा फायदा

अधिकारियों के अनुसार, भारत और हिंदू विरोधी बयानबाजी से जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक तौर पर खासा फायदा मिल रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाले दिनों में हिंसा और तेज हो सकती है। कई हिंदू परिवार पहले से ही भय के माहौल में जी रहे हैं और हालात बिगड़ने पर बड़े पैमाने पर पलायन की आशंका जताई जा रही है, जिससे सीमावर्ती इलाकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इस्लामिक राज्य और शरिया कानून की मांग

स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि कुछ नेता खुले तौर पर बांग्लादेश (Bangladesh Elections 2026) को इस्लामिक राज्य घोषित करने और संविधान के बजाय शरिया कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव संपन्न होने तक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा के रुकने की संभावना बेहद कम है। उलटे, यह सुनियोजित वोट बैंक राजनीति आने वाले दिनों में हालात को और विस्फोटक बना सकती है।

 

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *