Holi 2026: रंगों और खुशियों का त्योहार होली 4 मार्च को मनाया जाएगा। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन और फसल कटाई की खुशी का प्रतीक है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर उत्सव मनाते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाले अधिकांश सिंथेटिक रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई केमिकल रंगों में जहरीले रसायन, भारी धातुओं के कण और कभी-कभी कांच के बारीक टुकड़े तक पाए जाते हैं। ये त्वचा पर एलर्जी, जलन, आंखों में इरिटेशन और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। साथ ही, ये रंग पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं क्योंकि इन्हें विघटित होने में काफी समय लगता है।
MyGov India पोर्टल भी प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि घर पर बने प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित, बच्चों के अनुकूल और पूरी तरह पर्यावरण हितैषी होते हैं। इन्हें किचन और बगीचे में उपलब्ध साधारण चीजों से आसानी से तैयार किया जा सकता है।
Holi 2026: घर पर ऐसे बनाएं प्राकृतिक रंग
चुकंदर से गहरा लाल रंग आसानी से तैयार किया जा सकता है। 2-3 चुकंदर को कद्दूकस कर पानी में उबालें या पीसकर रस निकाल लें। छानकर इसे गीले रंग के रूप में इस्तेमाल करें। सूखा गुलाल बनाने के लिए रस में कॉर्नस्टार्च या आटा मिलाकर धूप में सुखाएं।
वैकल्पिक रूप से लाल गुड़हल, लाल गुलाब की पंखुड़ियां, अनार के छिलके या टमाटर का रस भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
हल्दी को पानी में उबालकर छान लें। इसे बेसन, चावल के आटे या कॉर्नस्टार्च में मिलाकर सूखा पीला गुलाल तैयार करें।
गेंदे (मैरिगोल्ड) के फूलों की पंखुड़ियां उबालकर भी चमकीला पीला रंग बनाया जा सकता है।
पालक, धनिया या अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों को धोकर उबालें और पीसकर रस निकाल लें। इसे छानकर इस्तेमाल करें। नीम की पत्तियां भी हरा रंग देती हैं और इनमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। सूखा रंग बनाने के लिए रस को कॉर्नस्टार्च में मिलाकर सुखाएं।
चुकंदर के रस को पतला करके हल्का गुलाबी रंग पाया जा सकता है। गुलाब या नयनतारा के फूल उबालकर भी गुलाबी रंग तैयार होता है। प्याज के छिलकों को उबालने से हल्का गुलाबी शेड मिलता है।
बटरफ्लाई पी (विष्णुकांता) के फूलों को पानी में भिगोकर या उबालकर नीला रंग निकाला जा सकता है। जैकरांडा के फूल भी नीला रंग देते हैं। इसे कॉर्नस्टार्च के साथ मिलाकर सूखा गुलाल बनाया जा सकता है।
पलाश के फूल या मेहंदी (जेतुका) की पत्तियों को उबालकर नारंगी रंग तैयार करें। हल्दी और चुकंदर के रस को मिलाकर भी नारंगी शेड बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक रंग न केवल सुरक्षित होते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। इस बार होली पर घर में बने रंगों के साथ त्योहार मनाएं, ताकि खुशियों के साथ सेहत और प्रकृति की भी रक्षा हो सके।