Mithila Rajya: अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में 3 फरवरी को संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पृथक मिथिला राज्य के गठन की मांग को लेकर भव्य धरना एवं प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन के जरिए मिथिला से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को केंद्र सरकार और देशभर के जनप्रतिनिधियों के सामने मजबूती से उठाया जाएगा।
Mithila Rajya: मिथिला के सर्वांगीण विकास की मांग
धरना-प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति की ओर से पृथक मिथिला राज्य का गठन, संवैधानिक भाषा मैथिली को उसके समुचित अधिकार, केंद्रीय बजट में मिथिला क्षेत्र के लिए पर्याप्त राशि का आवंटन, दरभंगा में एम्स (AIIMS) के शीघ्र निर्माण, मिथिला क्षेत्र के समग्र विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आमजन और नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
Mithila Rajya: धरना की अध्यक्षता डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू करेंगे
इस धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू करेंगे, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रो. अमरेन्द्र कुमार झा के द्वारा किया जाएगा।
मिथिला की पहचान और अधिकार का सवाल
रविवार को जारी एक प्रेस बयान में डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि “मिथिला की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और भाषाई आजादी के बिना समग्र मिथिला क्षेत्र का विकास असंभव है। सड़क से संसद तक संघर्ष जारी है और पृथक मिथिला राज्य के गठन तक यह आंदोलन अनवरत चलता रहेगा।”
Mithila Rajya: सौ वर्षों से लंबित है पृथक मिथिला राज्य की मांग
डॉ. बैजू ने कहा कि सनातनी मिथिला को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को सौ वर्षों से अधिक समय बीत चुका है। उन्होंने बताया कि इसी भौगोलिक क्षेत्र से बंगाल से बिहार, बिहार से उड़ीसा और झारखंड जैसे राज्य बने, लेकिन आठ करोड़ से अधिक मिथिलावासियों की मांग को अब तक नजरअंदाज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
Mithila Rajya: बिहार में लुप्त होती मैथिलों की पहचान
उन्होंने कहा कि मैथिल समाज लगातार बिहार से अलग होने की बात इसलिए कर रहा है क्योंकि “मैथिलों के लिए ‘बिहारी’ शब्द मिथिला की पहचान, नैतिक मूल्यों, सभ्यता-संस्कृति, भाषा और विकास में बाधक बन रहा है, जिससे मैथिलों की विशिष्ट पहचान धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।”
Mithila Rajya: देश-विदेश से जुटेंगे प्रवासी मैथिल
डॉ. बैजू ने बताया कि इस धरना-प्रदर्शन में राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले लाखों प्रवासी मैथिलों के साथ-साथ भारत और नेपाल के विभिन्न हिस्सों से सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग के लोग भाग लेंगे।