India Israel Tie: इजरायल और हमास के बीच भले ही युद्धविराम पर सहमति बनी हो, लेकिन बीच-बीच में होने वाली झड़पों की खबरें रुक नहीं रही हैं। इसी बीच इजरायल ने भारत सरकार से आधिकारिक रूप से हमास को आतंकी संगठन घोषित करने का अनुरोध किया है।
इजरायल का कहना है कि पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और ईरानी प्रॉक्सी ग्रुप्स के साथ हमास के बढ़ते संबंध भारत और इजरायल दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।
India Israel Tie:इजरायल की भारत से आधिकारिक अपील
यरूशलम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इजरायल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत को हमास जैसे संगठन पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और इसे आतंकवादी संस्था घोषित करना चाहिए।
इजरायल ने बताया कि उसने कुछ वर्ष पहले ही लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी संगठन घोषित कर दिया था और चाहता है कि भारत भी इसी तरह का कदम उठाए। उल्लेखनीय है कि इजरायल ने 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के एक महीने बाद LeT पर प्रतिबंध लगाया था।
India Israel Tie: “भारत और इजरायल का एक साझा दुश्मन”
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा दोनों देशों का कॉमन दुश्मन है। आईडीएफ के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा कि यदि भारत हमास को आतंकवादी संगठन घोषित कर देता है, तो यह दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि हमारा मुकाबला किन संगठनों से है।
India Israel Tie: हमास-LeT के बढ़ते रिश्तों पर चिंता
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार भी ‘ईरानी और अंतरराष्ट्रीय आतंकी प्रॉक्सी ग्रुप्स के बढ़ते नेटवर्क’ से अवगत है। इजरायली अधिकारियों ने दावा किया कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा के बीच मजबूत संबंध दिखाई दे रहे हैं और दोनों संगठन अंतरराष्ट्रीय अपराधी नेटवर्क का उपयोग करके हमले करने की रणनीति अपना रहे हैं। उनका कहना है कि कई स्थानों पर ईरान सीधे कार्रवाई नहीं करता, बल्कि उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स हमलों को अंजाम देते हैं, जैसा कि लंदन में भी देखा गया।
India Israel Tie: ईरान की नीति में नहीं आया बदलाव
इजरायल ने कहा कि जून में हुई 12-दिवसीय लड़ाई और अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क को समर्थन देने की नीति में कोई बदलाव नहीं किया है।
इजरायली अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि संघर्ष के बाद ईरान अपनी रणनीति बदलेगा, लेकिन इसके विपरीत वह हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों पर अधिक निवेश कर रहा है।
अधिकारियों ने आगे कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का मौजूदा प्रेशर कैंपेन पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि केवल प्रतिबंधों की घोषणा करना शुरुआत है, लेकिन यह कदम पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली ट्रंप प्रशासन की तुलना में वर्तमान अमेरिकी प्रयास कमजोर दिखाई दे रहे हैं।