America: अमेरिका के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में गिने जाने वाले F-35 फाइटर जेट को उसकी आधुनिक तकनीक और स्टेल्थ क्षमता के कारण लगभग अजेय माना जाता रहा है।
हाल ही में ईरान ने दावा किया है कि उसने इस विमान को निशाना बनाया है। अब तक किसी भी युद्ध में F-35 के सफलतापूर्वक हिट होने की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए यह दावा काफी चर्चा में है।
America: F-35 विमान को अजेय क्यों माना जाता है?
F-35 को लगभग अजेय इसलिए माना जाता है क्योंकि यह एक डेटा-सेंट्रिक वॉरफेयर नेटवर्क का हिस्सा है। यह अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर बेहद प्रभावी तरीके से काम करता है।
यह विमान रडार, इंफ्रारेड सेंसर, सैटेलाइट और अन्य स्रोतों से मिले डेटा को जोड़कर पायलट को युद्ध क्षेत्र की रियल-टाइम जानकारी देता है। इससे पायलट दुश्मन को पहले देख सकता है और हमला करने में बढ़त हासिल करता है।
इसका खास डिजाइन, विशेष मटेरियल और इंटरनल वेपन बे इसे दुश्मन के रडार पर बहुत कम दिखाई देता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद सेंसर फ्यूजन सिस्टम इसे और भी खतरनाक बनाता है।
अमेरिकी विमान के वेरिएंट्स
F-35 के तीन मुख्य वेरिएंट हैं:
F-35A – पारंपरिक टेकऑफ और लैंडिंग, अमेरिकी वायु सेना द्वारा उपयोग
F-35B – वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग, मरीन कॉर्प्स के लिए
F-35C – एयरक्राफ्ट कैरियर आधारित, अमेरिकी नेवी द्वारा उपयोग
इन विमानों में इंटरनल और एक्सटर्नल मिलाकर कई हार्डप्वाइंट्स होते हैं, जिन पर एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें तथा बम लगाए जा सकते हैं। F-35 विमान की कीमत लगभग 100 मिलियन डॉलर (800 करोड़ रुपये से अधिक) है।
America: पैसिव इंफ्रारेड सिस्टम
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस हमले में लोइटरिंग म्यूनिशन (358 मिसाइल) का इस्तेमाल किया गया।
पैसिव इंफ्रारेड सिस्टम ऐसे होते हैं जो खुद कोई सिग्नल नहीं छोड़ते, बल्कि लक्ष्य की गर्मी (हीट) के आधार पर उसे पहचानते हैं। इसी वजह से विमान के रडार वॉर्निंग सिस्टम को ऐसे हमलों की पहले से जानकारी नहीं मिल पाती।
ईरान का कहना है कि उसने इस विमान को रडार से नहीं, बल्कि पैसिव इंफ्रारेड सिस्टम के जरिए ट्रैक किया। F-35 की स्टेल्थ तकनीक रडार से बचने के लिए बनाई गई है, लेकिन यह पूरी तरह से अपने हीट सिग्नेचर को नहीं छिपा सकती।