Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने मस्जिदों और अन्य निर्माणों से जुड़े पांच मामलों में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना और प्रभावित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर देना जरूरी है। राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि कारण बताओ नोटिस पर निर्णय होने तक संबंधित निर्माणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
गफूर मामले में खंडपीठ ने दिया आदेश
यह आदेश छह नवंबर को न्यायमूर्ति विनीत कुमार माथुर और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने गफूर बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में दिया। प्रभावित पक्षों की ओर से जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर अधिवक्ताओं ने पैरवी की। इनमें एडवोकेट हरीश कुमार पुरोहित और एडवोकेट इकबाल खान शामिल थे। एडवोकेट ताहिर हकीम और लीगल सेल के संयोजक प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी ने भी सहयोग किया।
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रशासन कारण बताओ नोटिस का जवाब प्राप्त करने और उस पर विचार करने से पहले ही बुलडोजर कार्रवाई कर रहा है। प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी नहीं दिया जा रहा है।
इस पर अदालत ने अपीलकर्ताओं को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया। साथ ही निर्देश दिया कि जवाब मिलने के बाद सक्षम अधिकारी प्रभावित पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर दें। सभी संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद कानून के अनुसार कारण सहित लिखित आदेश पारित किया जाए।
चार अन्य अपीलों का भी निस्तारण
इसी दिन खंडपीठ ने चार अन्य अपीलों का भी निस्तारण किया। अदालत ने कहा कि इन मामलों के तथ्य गफूर बनाम राजस्थान राज्य मामले में दिए गए आदेश के दायरे में आते हैं। इनमें बाड़मेर की मस्जिद आदर्श नगरी (अपील संख्या 1358/2026), मनोहर मस्जिद (1360/2026), जैसलमेर के भरीवाला निवासी हसन हुसैन (1365/2026) और बाड़मेर के मलाना गांव निवासी मुस्तफा खान (1368/2026) की अपीलें शामिल हैं।
14 मस्जिदों और मजारों को ध्वस्त करने का आरोप
जमीयत उलमा-ए-राजस्थान के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में मस्जिदों और दरगाहों के खिलाफ कार्रवाई 18 जून 2026 को शुरू हुई थी। संगठन का आरोप है कि इस दौरान 14 मस्जिदों और मजारों को ध्वस्त किया गया तथा प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद जमीयत उलमा-ए-राजस्थान के महासचिव मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री ने प्रभावित लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में 40 से अधिक याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन्हें 13 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया गया।
इसके बाद जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वहां मामलों की पैरवी की, जिसके बाद 15 दिनों का अंतरिम स्थगन आदेश मिला। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार बाद में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपीलें दाखिल की गईं।
जमीयत का प्रतिनिधिमंडल प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुका है
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान जमीयत उलमा-ए-हिंद का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश जमीयत के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी के नेतृत्व में राजस्थान पहुंचा था। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल को प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोक दिया गया था।
गत 16 अक्टूबर को जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इसमें जमीयत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून, मौलाना मुफ्ती जाकिर हुसैन कासमी, नाजिम-ए-तंजीम जमीयत उलमा-ए-हिंद (उत्तर) और मौलाना अजीमुल्लाह सिद्दीकी, सचिव जमीयत उलमा-ए-हिंद शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मालासर और मीरपुरा सहित विभिन्न गांवों में ध्वस्त मस्जिदों का जायजा लिया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के मुताबिक, ये मस्जिदें दूरदराज के पहाड़ी इलाकों की छोटी बस्तियों में स्थित थीं। स्थानीय लोगों ने कठिन परिस्थितियों में रेतीली जमीन पर इनका निर्माण कराया था। मस्जिदों की स्थिति देखकर प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भावुक हो गए।
जमीयत ने कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही
हाईकोर्ट के आदेश पर जमीयत उलमा-ए-राजस्थान के जिम्मेदारों ने उम्मीद जताई कि प्रभावित लोगों को न्याय मिलेगा और प्रशासन कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगा।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष एवं अमीर-ए-शरीअत कारी मोहम्मद अमीन पोखरण, राजस्थान जमीयत के अध्यक्ष मौलाना हबीबुल्लाह कासमी, महासचिव मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री, उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद नोमान कासमी, मौलाना मोहम्मद यूनुस कासमी और हाफिज मंजूर अली खान, सचिव मौलाना मोहम्मद अय्यूब कासमी और मौलाना मोहम्मद अरशद कासमी तथा नाजिम-ए-तंजीम मौलाना मोहम्मद इलियास कासमी और मौलाना मोहम्मद इब्राहिम गफूरी सहित अन्य जिम्मेदारों ने क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
जमीयत ने कहा कि प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने के लिए संगठन की कानूनी और संवैधानिक लड़ाई जारी रहेगी।





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